NitiN Raj SHARMA

Friday, 21 October 2016

एक अपील अभिभावकों के नाम

सभी अभिभावकों को दीपावली व नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।
    अभिभावक व शिक्षक दोनो का उददेश्य छात्र के भविष्य का निर्माण करना होता है। शिक्षक छात्र को ज्ञान देता है और माता-पिता बच्चे के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं और इन दोनो के संयोग से छात्र के चरित्र का निर्माण होता है। किसी बच्चे का व्यक्तित्व उसके माता-पिता के आचरण व चरित्र का दर्पण होता है और उसका ज्ञान शिक्षक के ज्ञान की सीमा को प्रदर्शित करता है।
    वर्तमान में बदली हुई सामाजिक परिस्थितियों में जहां शिक्षक के अधिकार बहुत ही सीमित है, माता-पिता का दायित्व कहीं अधिक बढ़ जाता है। विद्यालय में एक छात्र मात्र 5-6 घंटे रहता है और शेष समय घर पर व्यतीत करता है। ऐसे में शिक्षक उसे ज्ञान तो दे सकता है, किन्तु उसके चरित्र निर्माण में माता-पिता का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। किसी भी बच्चे की पहली पाठशाला उसका अपना घर होता है एवं माता पिता उसके पहले शिक्षक। बच्चे जो घर में देखते हैं, उत्सुकतावश उसे ही अपनाना शुरू कर देते हैं और उन्ही छोटी-छोटी चीजों को अपनाने से उनके आचरण व चरित्र का निर्माण शुरू होता है, इसलिए अभिभावकों का व्यवहार अत्यंत संयमित व संतुलित होना अति आवश्यक है।
    लक्ष्य विद्या मंदिर का उददेश्य मात्र छात्र को शिक्षित करना ही नहीं बल्कि उसके चरित्र का निर्माण करना भी है, क्योंकि बिना चरित्र के शिक्षा दिशाहीन है। लक्ष्य विद्या मंदिर का प्रयास शिक्षक व अभिभावक के मध्य तालमेल स्थापित करना है, जिससे छात्र के उजज्वल भविष्य का निर्माण हो सके। शिक्षक का कार्य केवल छात्र के दिमाग में शिक्षा को जबरन भरना नहीं है, बल्कि उसे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। शिक्षा मात्र पुस्तकों में लिखा हुआ ज्ञान नहीं है बल्कि बिना संयम व आत्मविश्वास खोये, कुछ भी सुनने की योग्यता ही शिक्षा है और ज्ञान वह शक्तिशाली हथियार है, जिससे एक छात्र दुनिया को बदल सकता है। हमारा यह प्रयास मात्र दीवार पर टंगा कैलेण्डर भर न रहे, बल्कि हम इसे अपने जीवन में  उतारने का प्रयास करें।
    लक्ष्य विद्या मंदिर का प्रयास छात्र को ऐसी शिक्षा और ज्ञान देना है, जिससे वह समाज की दशा व दिशा को बदल सके, किन्तु अभिभावकों के सहयोग के बिना यह असंभव है। बच्चे किसी भी समाज व् राष्ट्र का भविष्य होते हैं और हमारे इस प्रयास में आपका सहयोग प्रार्थनीय है।
    आईये हम और आप मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जिसमें हम बिना किसी रूकावट के अपने सपनों को साकार कर सकें जिससे दूसरों को भी प्रेरणा मिले।
धन्यवाद