NitiN Raj SHARMA

Tuesday, 16 January 2018

ना हार मानें और ना ही रुकें

 
    आगत कठिनाइयों को देखकर निठाल हो बैठना और रोते कलपते समय गँवाना, विपत्ति को दूना करने के समान है। हमें यह मानकर ही चलना पड़ेगा कि जीवन आरोह अवरोध के ताने-बाने से बुना गया है। धूप, छाँह की तरह सफलताओं और असफलताओं की उभयपक्षीय हलचलें होती ही रहती है और होती ही रहेगी। सर्वथा सुख-सुविधाओं से भरा जीवन क्रम कदाचित् ही कोई जीता है। ज्वार-भाटों की तरह उठाने और गिराने वाली परिस्थितियाँ अपने ढंग से आती और अपनी राह चली जाती है। वट पर बैठकर उतार-चढ़ाव का आनन्द लेने वाले ही जीवन नाटक के अनुभवी कलाकार कहे जा सकते हैं।

    सदा दिन ही बना रहे रात कभी आये ही नहीं भला यह कैसे हो सकता है? जन्मोत्सव ही मनाये जाते रहे, मरण का रुदन सुनने को न मिले यह कैसे सम्भव है। सुख की घड़ियाँ ही सामने रहें, दुःख के दिन कभी न आयें यह मानकर चलना यथार्थता की ओर से आंखें मूँद लेने के समान है। बुद्धिमान वे है जो सुखद परिस्थितियों का समुचित लाभ उठाते हैं और दुःख की घड़ी आने पर उसका सामना करने के लिए आवश्यक धैर्य और साधन इकट्ठा करते रहते हैं।

   ऐसे ईर्ष्यालु इस दुनिया में कम नहीं जो किसी का सुख सन्तोष फूटी आँखों नहीं देख सकते। जिनके अन्धेर अनाचार में बाधा पड़ती है वे भी शत्रु बन बैठते हैं। अनुचित लाभ उठाने के उत्सुक भी शोषण एवं आक्रमण से बाज़ कहाँ आते हैं और अनन्त काल तक रहेगा। उनसे बच निकलना कठिन है। हाँ, इतना हो सकता है कि अपना शौर्य साहस इतना विकसित कर लिया जाय कि उन्हें छेड़-छाड़ करने का साहस ही न हो। व्यक्तिगत समर्थता के अतिरिक्त आपने साथी सहकारी बढ़ाकर भी आततायी की गति विधियों पर अंकुश किया जा सकता है। प्रतिरोध और प्रतिकार की शक्ति बढ़ाकर ही आक्रमणकारियों से अपनी आँशिक सुरक्षा हो सकती है। उनका सामना ही न करना पड़े, कुछ अनुचित अवांछनीय सामने आये ही नहीं, ऐसा सोचना आकाश कुसुम पाने जैसी बात-कल्पना है। अवरोधों से जूझने और संघर्षों के बीच अपना रास्ता बनाने के अतिरिक्त यहाँ और कोई रास्ता है ही नहीं।

Sunday, 7 January 2018

गलती और सुधार


मुश्किल है लगातार खुद को प्रेरित रख पाना लेकिन नामुमकिन नहीं।
प्रेरित रहें और प्रेरणाशील बनने का प्रयास लगातार रहना चाहिए।
कोई भी इस संसार में 100 प्रतिशत सही नहीं है। गलतियां अगर हों तो उन्हें तुरंत सुधार कर दोगुनी ताकत से आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए हमें जुट जाना चाहिए।

साथ में अपने आस पास जो असीम ताकतें हैं उनका प्रयोग करना चाहिए। कभी ना कभी कोई आपको जरूर मिलेगा जिससे आपका मार्गदर्शन हो सके लेकिन उसे पहचानने की जिम्मेदारी आपकी है।

ये आवश्यक नहीं कि हमें हर एक सुविधा हो तभी हम कामयाब बनेंगे या कोई आवश्यक कदम उठाएंगे जरूरी है कि प्रत्येक पल का लाभ लें और आगे की ओर प्रयास करते रहें, लेकिन इन सभी के लिए हमारा वर्तमान में होना आवश्यक है।

वर्तमान में रहते हुए भविष्य की ओर निगाह रखें और अपना प्रयास करते रहें।
दूसरे की गलतियों से हम ज्यादा सीखते हैं और उसकी गलती का परिणाम अगर बुरा है तो हमें कोई अधिकार नहीं मिलता कि हम भी वही काम दोहराएं। उससे बचने की कला हमें दूसरों से अलग बनाती है। यही हमारी कामयाबी की सीढ़ी भी बनती है।

Monday, 1 January 2018

2017 - A year's recall


It has started 2018 and on the very first day I want to recall my 2017.
Have a look

When 2017 started it was full of opportunities for me so I took those all with full hands. All and everything was going on right way. But in the month of April it was time when I missed someone and yes she was !!!!
Then all went quite better for 2 or 3 months. Later on it started unnecessarily egoistic battles between staff members and then I sorted it out.
Then due to hectic schedule could not make it better.
Then diwali and then december.
And in December I broke into tears just because of someone's unacceptable allegations.
I don't want to name them but I pray for them and yes I wished them too , may they get what they want.
But in real it is the toughest to get what we want.

What I learnt ?

I learnt lots of things
1).     never get attached to someone more than yourself because then pain of separation is quite unbearable.

2).     to obey your elder ones and specially your parents is far more important than anything else.

3).     Do your work with full joy.

4).     Love is more important than hate. So be in love where ever you are , what ever you do.

Yet again happy new year 2018.

नूतन वर्ष 2018

Almost 7 months it has been far away from blogs and mostly 2017 was away from here but there in 2018 shall update regularly.

नव वर्ष 2018 आपके लिए मंगलमय हो।
इसी मनोकामना के साथ कुछ पंक्तियाँ आपके लिए।

तूफानी लहरें हों अम्बर के पहरे हों,
पुरवा के दामन पर दाग बहुत गहरे हों,
सागर के मांझी, मत मन को तू हारना,
जीवन के क्रम में, जो खोया है पाना है,
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है ;

राजवंश रूठे तो राज मुकुट टूटे तो
सीतापति राघव से राजमहल छूटे तो
आशा मत हार, पर सागर के एक बार,
पत्थर में प्राण फूंक सेतू बनाना है,
अंधियारे के आगे दीप फिर जलाना है,
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है;

घर-घर चाहे छोड़े, सूरज भी मुँह मोड़े
विदुर रहे मौन, छीने राज्य, स्वर्ण रथ,घोड़े
माँ का बस प्यार, सार गीता का साथ रहे,
पंचतत्व सौ पर है भारी बतलाना है
जीवन का राजसूय यज्ञ फिर कराना है,
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है ;

Happy new year 2018
🙏