अभी तो एक ठीक सा निर्णय ही लिया था मैंने कि सभी मेरे को कसूरवार ठहराने लगे। कहते हैं वो कि मैं ऐसा था या मैं वैसा था, इन सभी का मेरे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ने।
शायद इसका कारण है कि मैंने कभी किसी से कोई उम्मीद नहीं की।
इतना कुछ जानने और समझने को मिला है कि शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। लेकिन बताया भी नहीं जा सकता क्योंकि सब बेकार का ही था।
मेरी मेहनत और मेरा बिस्वास मेरे साथ है।
आशा ही नहीं अपितु पूरा विश्वास कि अच्छा होगा।
श्री राधे।
निर्णय की बात आगे !!!!!!
Thursday, 11 February 2016
मेरा एक निर्णय
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