NitiN Raj SHARMA

Monday, 24 September 2018

A Poem


फ़ांसी कॆ फन्दॊं कॊ हम , गर्दन दान दिया करतॆ हैं ! 
गॊरी जैसॆ शैतानॊं कॊ भी ,जीवन-दान दिया करतॆ हैं !! 
क्षमाशीलता का जब कॊई , अपमान किया करता है ! 
अंधा राजपूत भी तब, प्रत्यंचा तान लिया करता है !! 
भारत की पावन धरती नें , ऎसॆ कितनॆं बॆटॆ जायॆ हैं ! 
स्वाभिमान की रक्षा मॆं,उन नॆं निज शीश चढ़ायॆ हैं, !!
दॆश की ख़ातिर ज़िन्दगी हवन मॆं, झॊंकतॆ रहॆ हैं झॊंकतॆ रहॆंगॆ ! 
कलम की नॊंक सॆ आँधियॊं कॊ हम,रॊकतॆ रहॆ हैं रॊकतॆ रहॆंगॆ !! 
स्वाभिमान की रक्षा मॆं, महिलायॆं ज़ौहर कर जाती हैं ! 
आन नहीं जानॆं दॆतीं जलकर, ज्वाला मॆं मर जाती हैं !! 
याद करॊ पन्ना माँ जिस नॆं, दॆवासन कॊ हिला दिया ! 
राजकुँवर की मृत्यु-सॆज पर, निज बॆटॆ कॊ सुला दिया !! 
भारत की तॊ नारी भी, दुर्गा है रणचण्डी है, काली है ! 
तलवार उठा लॆ हाँथॊं मॆं, तॊ महारानी झांसी वाली है !! 
खाकर घास की रॊटी गर्व सॆ सीना, ठॊंकतॆ रहॆ हैं ठॊंकतॆ रहॆंगॆ ! 
कलम की नॊंक सॆ आँधियॊं कॊ हम,रॊकतॆ रहॆ हैं रॊकतॆ रहॆंगॆ !! 
हम पूजा करतॆ मर्यादाऒं कॊ, आदर्शॊं कॊ यह सच है ! 
पर पीठ नहीं दिखलातॆ हम, संघर्षॊं कॊ यह भी सच है !! 
माना कि इस भूमि पर,मर्यादा पुरुषॊत्तम राम हुयॆ हैं ! 
रिपु-मर्दन परसुराम कॆ भी,इसी धरा पर संग्राम हुयॆ हैं!! 
अहंकार कॆ दानव जब भी,पौरुष कॊ ललकारा करतॆ हैं ! 
लंका मॆं घुस कर रघु वंशज, रावण कॊ मारा करतॆ हैं !! 
सत्य का साथ दॆ सदा हम असत्य कॊ,टॊकतॆ रहॆ हैं टॊकतॆ रहॆंगॆ ! 
कलम की नॊंक सॆ आँधियॊं कॊ हम,रॊकतॆ रहॆ हैं रॊकतॆ रहॆंगॆ !! 
दॆश की एकता अखंडता कॊ, तॊड़नॆ मॆं लगॆ हैं बहुत ! 
शान्ति कॆ कलश कॊ आज, फॊड़नॆ मॆं लगॆ है बहुत !! 
दॆश की सरहदॊं कॊ तॊड़नॆ, मरॊड़नॆ मॆं लगॆ हैं बहुत ! 
भारत माँ का आज रक्त, निचॊड़नॆं मॆं लगॆ हैं बहुत !! 
न कॊई धर्म है उनका और,न कॊई ईमान है उनका ! 
भारत कॆ नमक कॆ ख़िलाफ़,गन्दा बयान है जिनका !! 
“भारतीय” दॆश कॆ ख़िलाफ़ गद्दार कई, भॊंकतॆ रहॆ हैं भॊंकतॆ रहॆंगॆ !! 
कलम की नॊंक सॆ आँधियॊं कॊ हम,रॊकतॆ रहॆ हैं रॊकतॆ रहॆंगॆ !!




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